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अध्यात्म

निष्काम कर्म : शान्तिपूर्ण जीवन हेतु गीता का रहस्य

श्रीमद्भगवद्गीता युद्धभूमि पर घटित भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुन के मध्य एक संवाद है। परन्तु इसका वास्तविक सन्देश केवल युद्ध के विषय में ही नहीं अपितु यह भी है कि प्रत्येक दिन बुद्धिमानीपूर्वक कैसे जीवन व्यतीत किया जा सकता है। इसकी सर्वाधिक…
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निष्काम कर्म: अशांत जगात मन:शांती मिळवण्यासाठी गीतेतली गुरूकिल्ली

भगवद्गीता हा भगवान श्रीकृष्ण आणि अर्जुन यांच्यातील रणांगणावर घडलेला संवाद आहे. परंतु, तिचा खरा संदेश केवळ युद्धाविषयी नसून, दररोज विवेकपूर्वक कसे जगावे याबद्दलही आहे. त्यातील एक अत्यंत सामर्थ्यशाली शिकवण म्हणजे निष्काम कर्म: फळांची आसक्ती न…
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संसार में रहते हुए भी ईश्वर के साथ एकात्मता : लाहिड़ी महाशय का प्रेरणास्पद जीवन

“बनत बनत बन जाए” — एक एक कदम चलते हुए, लक्ष्य को पाना। लाहिड़ी महाशय ने इन सरल, किन्तु गहन शब्दों से साधकों को सदा ही प्रोत्साहित किया कि वे पूर्ण रूप से वर्तमान में जीएँ, अपने सम्मुख उपस्थित क्षण को अपना सर्वस्व दें,  और विश्वास दिलाया कि…
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हिमालयातून आपल्या घरांपर्यंत : लाहिरी महाशयांची क्रियायोगाची देणगी

“बनत, बनत, बन जाए” — पायरी पायरीने ध्येय गाठले जाते. या साध्या पण अत्यंत गहन  शब्दांत लाहिरी महाशयांनी साधकांना प्रेरणा दिली की वर्तमान क्षणात संपूर्णपणे जगावे; समोर असलेल्या क्षणाला आपले सर्वोत्तम दिल्याने भविष्यातील प्रवास दैवी क्रमाने…
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लाहिड़ी महाशय: एक योगावतार, जिन्होंने क्रियायोग को जन-जन तक पहुँचाया

“ध्यान में ही अपनी सभी समस्याओं का समाधान ढूँढो। व्यर्थ अनुमान लगाते रहने के बदले ईश्वर से प्रत्यक्ष संपर्क करो।“  -लाहिड़ी महाशय कभी-कभी कोई आध्यात्मिक महापुरुष हमारे बीच मौन रहकर विचरण करता है, जो संसार की दृष्टि से छुपा रहता है तथापि…
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लाहिरी महाशय : जगाला क्रियायोग देणारे योगावतार 

“ध्यानाद्वारे तुमच्या सर्व समस्या सोडवा. निरर्थक कल्पनारंजन सोडून प्रत्यक्ष ईश्वर संपर्क साधा.”  — लाहिरी महाशय कधीकधी एखादा महान आत्मा शांतपणे आपल्या मध्ये वावरतो — जगाच्या नजरेला न दिसता, पण पुढील पिढ्यांसाठी तेजस्वी मार्ग आखून जातो.…
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जहाँ कृष्ण हैं, वहीं विजय है!

जन्माष्टमी का पर्व, इस धरा पर भगवान्‌ कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, यह प्रतिवर्ष हमें स्मरण कराता है कि हम अपने जीवन तथा अपने समस्त कर्मों को ईश्वर को बार-बार समर्पित करते रहें। भगवान्‌ कृष्ण का यह अमर संदेश हम भगवद्गीता के…
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जिथे भगवान श्रीकृष्ण आहेत, विजय तिथेच आहे!

जन्माष्टमी हा सण, जो भगवान श्रीकृष्णांच्या या भूतलावरील अवतारदिनाची आठवण करून देतो, आपल्याला दरवर्षी आपले जीवन व प्रत्येक कृती भगवंताकडे पुन्हा अर्पण करण्याची प्रेरणा देतो. भगवान श्रीकृष्णांचा अमर संदेश आपल्याला भगवद्गीतेतून प्राप्त होतो:…
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हृदय के पालने में श्रीकृष्ण का जन्म

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥ अर्थात (श्रीकृष्ण कहते हैं) जो भक्त अनन्य भाव से केवल मेरी शरण में रहते हैं और मेरा ध्यान करते हैं, उनके योग (आध्यात्मिक संरक्षण) और क्षेम (भौतिक…
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असीम कृपा के सागर – महावतार बाबाजी

“पूर्व और पश्चिम को कर्म और आध्यात्मिकता से मिलकर बना सुवर्णमध्य मार्ग स्थापित करना होगा। भौतिक विकास में भारत को पाश्चात्य जगत से बहुत कुछ सीखना है और बदले में भारत सभी द्वारा अपनाई जा सकने वाली ऐसी विधियों का ज्ञान दे सकता है, जिनसे…
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