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अध्यात्म

जहाँ कृष्ण हैं, वहीं विजय है!

जन्माष्टमी का पर्व, इस धरा पर भगवान्‌ कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, यह प्रतिवर्ष हमें स्मरण कराता है कि हम अपने जीवन तथा अपने समस्त कर्मों को ईश्वर को बार-बार समर्पित करते रहें। भगवान्‌ कृष्ण का यह अमर संदेश हम भगवद्गीता के…
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जिथे भगवान श्रीकृष्ण आहेत, विजय तिथेच आहे!

जन्माष्टमी हा सण, जो भगवान श्रीकृष्णांच्या या भूतलावरील अवतारदिनाची आठवण करून देतो, आपल्याला दरवर्षी आपले जीवन व प्रत्येक कृती भगवंताकडे पुन्हा अर्पण करण्याची प्रेरणा देतो. भगवान श्रीकृष्णांचा अमर संदेश आपल्याला भगवद्गीतेतून प्राप्त होतो:…
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हृदय के पालने में श्रीकृष्ण का जन्म

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥ अर्थात (श्रीकृष्ण कहते हैं) जो भक्त अनन्य भाव से केवल मेरी शरण में रहते हैं और मेरा ध्यान करते हैं, उनके योग (आध्यात्मिक संरक्षण) और क्षेम (भौतिक…
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असीम कृपा के सागर – महावतार बाबाजी

“पूर्व और पश्चिम को कर्म और आध्यात्मिकता से मिलकर बना सुवर्णमध्य मार्ग स्थापित करना होगा। भौतिक विकास में भारत को पाश्चात्य जगत से बहुत कुछ सीखना है और बदले में भारत सभी द्वारा अपनाई जा सकने वाली ऐसी विधियों का ज्ञान दे सकता है, जिनसे…
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महावतार बाबाजी — अनन्तकाल तक  प्रेरणा प्रदान करने वाले  सन्त

लाहिड़ी महाशय ने कहा है, “जब भी कोई श्रद्धा के साथ बाबाजी का नाम लेता है, उसे तत्क्षण आध्यात्मिक आशीर्वाद प्राप्त होता है।” महान् गुरु लाहिड़ी महाशय का यह प्रसिद्ध उद्धरण, जिसका उल्लेख श्री श्री परमहंस योगानन्द ने अपनी पुस्तक ‘योगी कथामृत’…
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गीता एक जीवनग्रंथ : ज्ञानरूपी गीता सागरातून निवडले सुंदर श्लोक

कवी, लेखक व पेशाने शिक्षक असलेल्या शरद अमृतकर यांचे गीता एक जीवनग्रंथ हे पुस्तक नुकतेच वाचण्यात आले. लेखकाचे या अगोदर गोधडी, मनागावनी माटी, सोबत काय येते व गीता मनी माय अशी चार पुस्तके प्रकाशित झाली असून गीता एक जीवन ग्रंथ हे…
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गुरु :  मौन ईश्वर की अभिव्यक्त वाणी

गुरु वह अनन्त द्वार हैं जिसके माध्यम से ईश्वर हमारे जीवन में प्रवेश करते हैं। तथा यदि हम अपनी इच्छा और चेतना को गुरु के साथ समस्वर नहीं करते हैं तो सम्भवतः ईश्वर भी हमारी सहायता नहीं कर सकते। आजकल लोग ऐसा मानते हैं कि शिष्यत्व…
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गुरू : मौन ईश्वराची व्यक्त वाणी

गुरू हा तो अनंत दरवाजा आहे, ज्याद्वारे ईश्वर आपल्या जीवनात प्रवेश करतो. आणि जर आपण आपली इच्छाशक्ती व चेतना गुरूंच्या चेतनेशी जोडली नाही, तर ईश्वर आपली मदत करूच शकत नाही. सध्याच्या काळी शिष्यत्वाचा विचार करणे म्हणजे आपली इच्छा गुरूंच्या…
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“जर तुम्ही आत्ताच आध्यात्मिक प्रयत्न केलेत तर भविष्यात सर्व काही सुधारेल.” – स्वामी…

“जर तुम्ही आत्ताच आध्यात्मिक प्रयत्न केलेत तर भविष्यात सर्व काही सुधारेल.” - स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजी                                                 या अविस्मरणीय शब्दांद्वारे, स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजींनी अधोरेखित केले की,…
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